महाराष्ट्र में तर्कसंगत एवं पारदर्शी बिजली टैरिफ व्यवस्था की वीटीए की मांग

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VTA

23 अगस्त 2026         9.15 PM

नागपुर - विदर्भ टैक्सपेयर्स एसोसिएशन (VTA) की कार्यकारिणी की बैठक वीटीए अध्यक्ष श्रवण कुमार मालू की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई, जिसमे महाराष्ट्र में बिजली की बढ़ती कुल लागत से उपभोक्ताओं, करदाताओं एवं व्यवसायों पर पड़ रहे बोझ पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।बैठक में कहा गया कि बिजली एक आवश्यक सेवा होने के साथ-साथ घरेलू उपभोक्ताओं, एमएसएमई, उद्योगों, कृषि, अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण इनपुट है। बिजली की बढ़ती प्रभावी लागत का सीधा असर वस्तुओं एवं सेवाओं की लागत पर पड़ता है और अंततः इसका बोझ आम उपभोक्ता पर आता है।

वीटीए की कार्यकारिणी ने इस विषय को महाराष्ट्र सरकार एवं महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग (MERC) के समक्ष उठाने तथा बिजली टैरिफ व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की मांग करने का निर्णय लिया। वीटीए ने कहा कि समीक्षा केवल प्रति यूनिट ऊर्जा शुल्क तक सीमित न रहकर बिजली बिल की कुल प्रभावी लागत को ध्यान में रखते हुए की जानी चाहिए, जिसमें फिक्स्ड एवं डिमांड चार्ज, एफएसी, टाइम ऑफ डे चार्ज, व्हीलिंग चार्ज, बिजली ड्यूटी तथा अन्य शुल्क शामिल हैं।

वीटीए ने डिमांड एवं फिक्स्ड चार्ज को तर्कसंगत बनाने, वास्तविक खपत के आधार पर  टाइम ऑफ डे टैरिफ की समय-सारणी की समीक्षा करने तथा रूफटॉप एवं कैप्टिव सोलर ऊर्जा में निवेश को प्रोत्साहित करने वाली व्यवस्था लागू करने की मांग की।कार्यकारिणी ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र की बिजली दरें अन्य राज्यों की तुलना में प्रतिस्पर्धी रहनी चाहिए, क्योंकि बिजली की लागत निवेश, रोजगार तथा महाराष्ट्र में व्यवसायों की प्रतिस्पर्धात्मकता को सीधे प्रभावित करती है।

वीटीए अध्यक्ष श्रवण कुमार मालू ने कहा कि वीटीए किसी विशेष क्षेत्र के लिए रियायती या विशेष टैरिफ की मांग नहीं कर रहा है, बल्कि ऐसी निष्पक्ष एवं पारदर्शी बिजली दर व्यवस्था चाहती है, जिसमें बिजली वितरण व्यवस्था की वास्तविक आवश्यकताओं के साथ-साथ उपभोक्ताओं एवं करदाताओं के हितों का भी संतुलन हो ।

वीटीए सचिव तेजिंदर सिंह रेणु ने कहा कि उद्योग, एमएसएमई, पर्यटन एवं रोजगार सृजन को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीतियों में बिजली टैरिफ नीति के साथ भी समानता और सामंजस्य होना चाहिए । उन्होंने कहा कि हॉस्पिटैलिटी सेक्टर तो इस व्यापक समस्या का केवल एक उदाहरण है, जो कई रोजगार देने वाले क्षेत्रों को प्रभावित कर रही है ।

सभा मे कार्यकारिणी मंडल द्वारा इस संबंध में मुख्यमंत्री, ऊर्जा विभाग एवं एमईआरसी को ज्ञापन सौंपने तथा बिजली टैरिफ की व्यापक समीक्षा एवं टैरिफ व्यवस्था में बड़े बदलाव से पहले सभी संबंधित हितधारकों से प्रभावी परामर्श की मांग करने का निर्णय लिया।वीटीए ने कहा, “सस्ती, योग्य एवं तर्कसंगत बिजली दरें केवल व्यवसायों के लिए ही नहीं, बल्कि आम उपभोक्ताओं को बढ़ती लागत के अप्रत्यक्ष बोझ से बचाने के लिए भी आवश्यक है।”

बैठक में उपाध्यक्ष हेमंत त्रिवेदी एवं अश्विन अग्रवाल (मेहाडिया), कोषाध्यक्ष पवन के. चोपड़ा, सहसचिव अमरजीत सिंह चावला एवं सीए हेमंत सारडा, पीआरओ राजेश कानूनगो तथा कार्यकारिणी सदस्य प्रवीण अग्रवाल, साकिब पारेख, गोविंद पटेल, वीरू बलानी, शरद सोनकुले, हेमंत शर्मा, प्रतीश गुजराती, नरेंद्रपाल सिंह (विक्की) ओसान एवं संजीव पुथरान उपस्थित थे।









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