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5 मार्च 2026 3.15 PM
नागपुर - एमएसईडीसीएल द्वारा पर 13 फरवरी, 2026 से नए सोलर एप्लीकेशन द्वारा सौर ऊर्जा के उत्पादन की क्षमता पर रोक लगाई गई तथा इससे संबंधित कई नए नियम लागू किए गए हैं जिसका महाराष्ट्र के व्यवसायियों एवं व्यापार संगठनों द्वारा तीव्र विरोध किया जा रहा है। इसी के तहत 2 मार्च 2026 को ऑल इंडिया रिन्यूएबल एनर्जी एसोसिएशन (AIREA) ने नागपुर के विभिन्न क्षेत्रो में रैली निकालकर इसका जोरदार विरोध दर्शाया।एआईआरईए ने नाग विदर्भ चेंबर ऑफ काॅमर्स से इस विरोध प्रदर्शन हेतु समर्थन मांगा जिसके बाद चेंबर ने इस विरोध प्रदर्शन में अपना पूर्ण समर्थन दिया है।
चेंबर की ऊर्जा समिति के संयोजक व एआईआरईए के अध्यक्ष साकेत सूरी ने बताया कि एमएसईडीसीएल की यह एप्लीकेशन जो राज्य के रेगुलेशन के खिलाफ है। इस बारे में कोई पॉलिसी डॉक्यूमेंट या घोषणा नहीं की गई और इसे सीधे राज्य पोर्टल पर लागू किया गया। इसके कारण भविष्य की एनर्जी प्लानिंग में रुकावट होगी।आगे उन्होंने बताया कि जब भी कोई सोलर सिस्टम लगाता है, तो इंस्टॉलेशन के बाद उसकी बिजली की खपत बढ़ जाती है। यह बढ़ी हुई खपत स्वाभाविक है और इससे भारत को बिजली वाला और एक विकसित देश बनाने में मदद मिलेगी। किंतु नए नियम के कारण एमएसईडीसीएल ग्राहकों के लिए बिजली खपत सीमा को कम करके आगे की सोचने के बजाय पीछे मुड़कर देखने वाला ऊर्जा नियोजन के दृष्टिकोण लागू करता है, जो भारत सरकार के प्रोग्रेसिव रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रिक व्हीकल अपनाने के उद्देश्य को पूरा करने में बाधा उत्पन्न करता है।
एमएनआरएफ और नेट मीटरिंग फ्रेमवर्क से ऑटो लोड एक्सटेंशन फ्रेमवर्क का विरोधाभास भी है एमएनआरएफ द्वारा खास तौर पर पीएम सूर्यघर योजना के लिए 10Kw तक के ऑटो लोड एक्सटेंशन पूरे देश में शुरू किया गया था, जिससे सोलर मंजूरी में तेजी आई। लेकिन कुछ महीनों से उसे भी घटाकर 5kW कर दिया गया और अब इस नए निर्देश के अनुसार इसे महाराष्ट्र में रोक दिया गया है। जिससे महाराष्ट्र में घरेलू सोलर अपनाने में बहुत रुकावट आएगी और पीएम सूर्यघर योजना को अपनाने पर बुरा असर पड़ेगा।
नए नियमों के तहत ग्राहकों को सौर ऊर्जा उत्पादन में सब्सिडी लेने पर मनमाने तरीके से प्रतिबंध लगाया गया है। एमएसईडीसीएल का दावा है कि ग्राहक ज्यादा सब्सिडी पाने के लिए ज्यादा सोलर कैपेसिटी लगा रहे हैं और ग्राहक औद्योगिक उपयोग के लिए घरेलू सब्सिडी का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और यह रोक सब्सिडी के गलत इस्तेमाल को रोकती है, जबकि पीएम सूर्यघर स्कीम के तहत ज्यादा कैपेसिटी वाला सोलर सिस्टम लगाने से सब्सिडी की रकम नहीं बढ़ती है।
एमएसईडीसीएल का यह आरोप बेबुनियाद और पूरी तरह से गुमराह करने वाला है। ऐसे मामले अलग-अलग हैं और इनके लिए कई स्टेज पर एमएसईडीसीएल की मंजूरी की जरूरत होती है। आरटीएस पोर्टल और नेशनल सोलर मिशन में बदलाव गैर-कानूनी है। एमएसईडीसीएल ने बिना किसी नोटिस के जो नया बदलाव लागू किया है।
एनवीसीसी के अध्यक्ष फारूक अकबानी ने कहा कि महाराष्ट्र में पहले ही अन्य राज्यों की तुलना में बिजली महंगी है जिसके कारण राज्य कई उद्योग पड़ोसी राज्य में शिफ्ट हो चुके हैं और कई राष्ट्रीय योजनाएं भी महंगी बिजली के कारण अन्य राज्य में चली गई हैं। चेंबर द्वारा पहले भी कई बार-बार बिजली की दरों, फिक्सड चार्ज आदि के लिए आवाज उठाई और इस मुहिम को चेंबर का पूर्ण समर्थन है।
चेंबर के सचिव सीए हेमंत सारडा ने कहा कि एक तरफ तो सरकार सौर ऊर्जा को बढ़ावा देती है तो दूसरी तरफ एमएसईडीसीएल सौर ऊर्जा के खपत की सीमा कम करके एवं उसके उसके सब्सिडी संबंधी कड़क नियम बनाकर आम जनता एवं व्यवसायियों को इसका लाभ लेने से रोक रहे हैं जिससे देश के आर्थिक विकास में भी बाधाएं आएंगी और सरकार का राजस्व भी कम होगा।
इस अवसर पर चेंबर अध्यक्ष फारूक अकबानी, पूर्व अध्यक्ष अश्विन प्रकाश मेहाड़िया अग्रवाल, उपाध्यक्ष स्वप्निल अहिरकर, सीए अश्विनी अग्रवाल, उमेश पटेल, सचिव सीए हेमंत सारडा, कोषाध्यक्ष सचिन पुनियानी, चेंबर की ऊर्जा समिति के संयोजक व एआईआरईए के अध्यक्ष साकेत सूरी, सदस्य तथा बड़ी संख्या में व्यापारीगण उपस्थित थे।


























































































