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रिवर्स बायर सेलर मीट रोड़ शो से नागपुर के निर्यात अवसरों को बढ़ावा
13 अप्रैल 2026 9.10 PM
नागपुर - अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से कैसे मिलें और उनसे कैसे व्यवहार करें तथा एमएसएमई के लिए निर्यात में अवसर” विषय पर एक व्यापक सत्र होटल सेंटर पॉइंट, नागपुर में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। यह सत्र आगामी रिवर्स बायर सेलर मीट (आरबीएसएम ) के लिए रैम्प पहल के अंतर्गत आयोजित रोड शो का हिस्सा था, जिसमें एमएसएमई , निर्यातकों और उद्योग से जुड़े हितधारकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। इस सत्र का संयुक्त आयोजन फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (फियो) और महाराष्ट्र स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमएसईडीसी ) द्वारा किया गया, जिसमें विदर्भ इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (एमआईडी) इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (एमआईए ) तथा इनफेड आईएम नागपुर का सहयोग प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम में प्रमुख अतिथियों के रूप में सुनील हजारे, महाप्रबंधक, डीआईसी नागपुर; कौशल मोहता, मानद सचिव, एवं अध्यक्ष एक्सिम फोरम; पी. मोहन, अध्यक्ष, एमआईडीसी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन; तथा अमोघ तिजारे, लीड एमएसएमई एंगेजमेंट, इन्फेड नागपुर ने अपने विचार व्यक्त किए।
सुनील हजारे, महाप्रबंधक डीआईसी नागपुर एवं वर्धा ने बताया कि रिवर्स बायर सेलर मीट विदर्भ क्षेत्र के निर्यातकों के लिए एक उत्कृष्ट अवसर है, जहां उन्हें अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से आमने-सामने मिलने और अपने उत्पादों तथा भविष्य के व्यापार पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा। कौशल मोहता ने निर्यात को बढ़ावा देने हेतु संस्था द्वारा किए जा रहे विभिन्न प्रयासों पर प्रकाश डाला, जिसमें एमएसएमएस को निर्यात दस्तावेजीकरण, डीजीएफटी प्रक्रियाओं तथा वैश्विक व्यापार प्रथाओं के बारे में शिक्षित करने के लिए कई कार्यक्रम शामिल हैं। उन्होंने व्यावहारिक केस स्टडी भी साझा किए।
कार्यक्रम की शुरुआत फियो, मुंबई के सहायक निदेशक अक्षय शाह द्वारा परिचयात्मक वक्तव्य और रिवर्स बायर सेलर मीट के अवलोकन से हुई।तकनीकी सत्र का संचालन निर्यात विशेषज्ञ मिहिर शाह ने किया, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ जुड़ने और निर्यात अवसरों की खोज पर एक जानकारीपूर्ण प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि निर्यात से बेहतर मूल्य प्राप्ति, बड़े बाजारों तक पहुंच और एमएसएमई के लिए वैश्विक पहचान स्थापित करने की अपार संभावनाएं हैं।
उन्होंने आइईसी , आरसीएमसी और आइसगेट जैसे आवश्यक पंजीकरणों के महत्व पर जोर दिया तथा मांग, प्रतिस्पर्धा और अनुकूलता के आधार पर उत्पादों और लक्षित बाजारों के चयन की आवश्यकता बताई। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की पहचान के प्रभावी तरीकों जैसे प्रदर्शनियों, व्यापार मेलों, बायर-सेलर मीट,प्रतिनिधिमंडलों में भागीदारी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग पर भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने दीर्घकालिक संबंध स्थापित करने के लिए व्यक्तिगत मुलाकात, प्रभावी संवाद और निरंतर फॉलो-अप के महत्व को रेखांकित किया। इसके अतिरिक्त, निर्यात लागत, मूल्य निर्धारण रणनीतियों, भुगतान शर्तों और जोखिम प्रबंधन पर भी व्यावहारिक जानकारी साझा की।
कार्यक्रम का समापन इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र और औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह सत्र अत्यंत जानकारीपूर्ण और लाभकारी सिद्ध हुआ, जिसने विदर्भ क्षेत्र के एमएसएमई को निर्यात की तैयारी, गुणवत्ता मानकों और बाजार पहुंच रणनीतियों के संबंध में महत्वपूर्ण ज्ञान प्रदान किया। साथ ही, एमएसएमई विकास को गति देने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उनकी उपस्थिति बढ़ाने के लिए विभिन्न सरकारी पहलों पर भी प्रकाश डाला गया।
इस अवसर पर प्रमुखता से सुनील हजारे, महाप्रबंधक, डीआईसी नागपुर, अमोघ तिजारे इनफेड, कौशल मोहता , अक्षय शाह, पी. मोहन और निखिल डब्ल्यू चौधरी उपस्थित थे।


























































































