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बढ़ती लागत से बचने के लिए बड़े उपभोक्ताओं को कैप्टिव ग्रीन पावर अपनाने की अपील
28 मार्च 2026 8.00 PM
नागपुर - विदर्भ इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा केस क्रमांक 75/2025 में पारित हालिया आदेश पर गहरा आघात और निराशा व्यक्त की है। अध्यक्ष प्रशांत मोहोता ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आयोग ने 25 जून 2025 के अवैध समीक्षा आदेश में निर्धारित वही उद्योग-विरोधी टैरिफ संरचना पुनः लागू कर दी है।
जून 2025 का उक्त आदेश मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा इस आधार पर निरस्त किया गया था कि उसमें अनिवार्य सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था। न्यायालय के निर्देशानुसार नई सार्वजनिक सुनवाई की प्रक्रिया प्रारंभ की गई, जिसमें वीआईए सहित अनेक हितधारकों ने ठोस, तार्किक एवं आंकड़ों पर आधारित प्रस्तुतियां दीं। दुर्भाग्यवश, ये सुनवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई प्रतीत होती हैं। एमईआरसी ने उपभोक्ताओं द्वारा उठाए गए तार्किक मुद्दों को पूरी तरह नजरअंदाज कर, डिस्कॉम के राजस्व अंतर को उद्योगों के अस्तित्व से अधिक प्राथमिकता दी है।
वीआईए ने यह भी स्पष्ट किया है कि महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड द्वारा यह दावा कि इस आदेश से बिजली दरों में वृद्धि नहीं हुई है, भ्रामक है। वास्तविक बिजली लागत का मूल्यांकन फिक्स्ड डिमांड चार्ज, फ्यूल एडजस्टमेंट कॉस्ट (FAC) तथा बिजली विक्रय कर (TOS) सहित किया जाना चाहिए, न कि केवल बेस टैरिफ के आधार पर। प्रभावी रूप से औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली की लागत 11 रुपये प्रति यूनिट से अधिक हो गई है। महाराष्ट्र ऐसा एकमात्र राज्य बन गया है जहां बिजली की लागत दो अंकों में पहुंच चुकी है।
ग्रिड सपोर्ट चार्ज (GSC) की विसंगति : रूफटॉप सोलर के लिए बड़ा झटका
अध्यक्ष प्रशांत मोहोता ने कहा कि वीआईए आयोग के इस निर्णय से अत्यंत आहत है, जिसमें ग्रिड सपोर्ट चार्ज (GSC) लागू किया गया है। यह निर्णय अत्यंत प्रतिगामी है, क्योंकि इसमें नेट-मीटरिंग मॉडल के तहत केवल ग्रिड को निर्यात की गई अतिरिक्त बिजली पर नहीं, बल्कि रूफटॉप सोलर सिस्टम द्वारा उत्पन्न कुल (ग्रॉस) बिजली पर शुल्क लगाया जाएगा।
यह मूल रूप से त्रुटिपूर्ण और कानूनी रूप से अनुचित है कि उपभोक्ताओं को उस बिजली के लिए दंडित किया जाए, जिसे उन्होंने अपने खर्च पर स्वयं उत्पन्न किया और अपने परिसर में ही उपयोग किया। उपभोक्ता पहले से ही वितरण नेटवर्क के रखरखाव हेतु डिमांड चार्ज का भुगतान करते हैं, ऐसे में ग्रॉस जनरेशन पर GSC लगाना दोहरा बोझ है। यह कठोर निर्णय नवीकरणीय ऊर्जा नीतियों पर विश्वास को कमजोर करेगा और वर्तमान तथा भविष्य के नेट-मीटरिंग सोलर मॉडलों की आर्थिक व्यवहार्यता को समाप्त कर देगा।
बैंक्ड पाॅवर से संबंधित मुद्दे
सोलर ओपन एक्सेस (O.A.) में दी गई छूट पर भी इस टैरिफ आदेश का प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। पहले बैंक की गई बिजली (Banked Power) का उपयोग दिन में 17 घंटे तक करने की अनुमति थी, जबकि इस नए आदेश में इसे घटाकर केवल 8 घंटे (सुबह 9:00 से शाम 5:00 बजे तक) कर दिया गया है। शेष अप्रयुक्त बिजली माह के अंत में समाप्त (लैप्स) हो जाएगी।
यह प्रावधान जुलाई 2025 से पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव इफेक्ट) से लागू किया गया है, जिसके कारण सभी सोलर ओपन एक्सेस उपभोक्ताओं पर भारी वित्तीय भार पड़ेगा और यह पूरी प्रक्रिया व्यावहारिक रूप से अव्यवहार्य हो जाएगी। प्रशांत मोहोता ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से विनम्र अनुरोध किया है कि वे इस विषय में हस्तक्षेप करें और राज्य के उद्योगों को इस अत्यधिक लागत के बोझ से राहत प्रदान करें, ताकि वे अपने संचालन को बनाए रख सकें।


























































































