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माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज डेवलपमेंट (संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित होने पर प्रतिक्रिया
9 अगस्त 2026 4.25 PM
नागपुर - “माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज डेवलपमेंट (संशोधन) विधेयक, 2026 का संसद द्वारा पारित किया जाना भारत के एमएसएमई क्षेत्र को अधिक सशक्त, सक्षम और विकासोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं स्वागतयोग्य कदम है।
एमआईडीसी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष पी मोहन ने कहा कि,एमएसएमई क्षेत्र रोजगार, विनिर्माण और क्षेत्रीय आर्थिक विकास की रीढ़ है। इस क्षेत्र को केवल वित्तीय सहायता ही नहीं, बल्कि एक पारदर्शी, समयबद्ध और व्यवसाय-अनुकूल नियामक व्यवस्था की भी आवश्यकता है। प्रस्तावित संशोधन विशेष रूप से भुगतान में देरी, विवादों के समाधान, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस तथा एमएसई फेसिलिटेशन काउंसिल्स को मजबूत करने जैसे लंबे समय से लंबित मुद्दों को संबोधित करते हैं।
ऑनलाइनडिस्पुट रिजोल्यूशन : मध्यस्थता एवं पंचाट के लिए निर्धारित समय-सीमा तथा अवार्ड की राशि की प्रभावी वसूली के प्रावधान सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। विशेष रूप से, अवार्ड की राशि को भूमि राजस्व के बकाये के रूप में वसूल करने का प्रावधान सराहनीय है, क्योंकि किसी भी निर्णय की वास्तविक उपयोगिता तभी है जब एमएसएमई को उसकी देय राशि समय पर प्राप्त हो सके।
TReDS के माध्यम से सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज द्वारा एमएसएमई के चालानों के निपटान को अनिवार्य करना भी एक प्रगतिशील कदम है। एमएसएमई के अस्तित्व और विस्तार के लिए समय पर भुगतान तथा पर्याप्त कार्यशील पूंजी अत्यंत महत्वपूर्ण है। TReDS के व्यापक उपयोग से एमएसएमई क्षेत्र की तरलता में निश्चित रूप से सुधार होगा।
मोहन ने कहा कि,राज्य सरकारों को एक से अधिक एमएसई फेसिलिटेशन काउंसिल्स स्थापित करने की अनुमति देना भी महत्वपूर्ण सुधार है। मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, विकेंद्रीकृत, पर्याप्त संसाधनों से युक्त और प्रभावी फेसिलिटेशन काउंसिल्स लंबित मामलों को कम करने तथा एमएसएमई आपूर्तिकर्ताओं को शीघ्र न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने कहा,हम कुछ प्रावधानों के अपराधीकरण को समाप्त करने तथा क्रमिक सिविल दंड लागू करने के निर्णय का भी स्वागत करते हैं। यह कदम विश्वास-आधारित नियामक व्यवस्था की ओर एक सकारात्मक बदलाव है और इससे उद्यमियों में अनजाने में होने वाली अनुपालना संबंधी त्रुटियों को लेकर अनावश्यक भय कम होगा।
हिंगणा और नागपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के दृष्टिकोण से इन सुधारों की वास्तविक सफलता इनके प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। अतः हम महाराष्ट्र सरकार से आग्रह करते हैं कि एमएसएमईएफसी व्यवस्था को और मजबूत किया जाए, पर्याप्त आधारभूत सुविधाएं एवं मानव संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, डिजिटल एवं समयबद्ध प्रक्रियाएं अपनाई जाएं तथा फेसिलिटेशन काउंसिल्स के निर्णयों और अवार्ड की प्रभावी वसूली सुनिश्चित की जाए।
समग्र रूप से, एमआईए इन संशोधनों का स्वागत करता है। ये सुधार एमएसएमई के नकदी प्रवाह, विवाद समाधान, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और उद्यमों के निवेश एवं विस्तार के प्रति विश्वास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होनें कहा, हमें विश्वास है कि एक आर्थिक रूप से सशक्त, प्रतिस्पर्धी और कम नियामकीय बोझ वाला एमएसएमई क्षेत्र भारत को ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य की ओर ले जाने तथा रोजगारपरक और समावेशी आर्थिक विकास को गति देने में एक शक्तिशाली इंजन साबित होगा।”



















