डीजल खरीद एवं आपूर्ति संबंधी नए परिपत्र से लाखों वास्तविक उपभोक्ता हो सकते हैं प्रभावित

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अव्यवस्था रोकने हेतु कैमिट ने मुख्यमंत्री फडणवीस से की तत्काल हस्तक्षेप की मांग

 6 जून 2026            11.50 AM

नागपुर - चेंबर ऑफ एसोसिएशन्स ऑफ महाराष्ट्र इंडस्ट्री एंड ट्रेड (कैमिट) ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा 5 जून 2026 को जारी डीजल खरीद एवं आपूर्ति संबंधी परिपत्र के संभावित प्रभावों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। कैमिट ने स्पष्ट किया है कि वह जमाखोरी, कालाबाजारी एवं पेट्रोलियम उत्पादों के अनधिकृत दुरुपयोग पर रोक लगाने के राज्य सरकार के प्रयासों का पूर्ण समर्थन करता है। तथापि, संगठन का मानना है कि वर्तमान स्वरूप में इस परिपत्र का क्रियान्वयन राज्य के लाखों वास्तविक डीजल उपभोक्ताओं के लिए भ्रम, बाधा एवं कठिनाइयों का कारण बन सकता है।

कैमिट के अध्यक्ष डॉ. दीपेन अग्रवाल ने कहा कि यदि तत्काल आवश्यक स्पष्टीकरण जारी नहीं किए गए तो इस परिपत्र का प्रतिकूल प्रभाव अस्पतालों, नर्सिंग होम्स, डायग्नोस्टिक सेंटरों, हाउसिंग सोसायटियों, आवासीय परिसरों, रेस्टोरेंट्स, होटलों, बैंक्वेट हॉल्स, शैक्षणिक संस्थानों, रिटेल दुकानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, लघु एवं मध्यम उद्योगों, गोदामों, कोल्ड स्टोरेज, टेलीकॉम टावरों, बैंकों, एटीएम, इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों, निर्माण कार्यों, कृषि गतिविधियों तथा ऐसे अनेक प्रतिष्ठानों पर पड़ सकता है जो निर्बाध संचालन के लिए डीज़ल जनरेटर एवं डीजल आधारित उपकरणों पर निर्भर हैं।

डॉ. अग्रवाल ने कहा, “ कैमिट जमाखोरों, कालाबाजारी करने वालों एवं अनधिकृत व्यापारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई का पूर्ण समर्थन करता है। किंतु वास्तविक उपभोक्ताओं को ऐसे कदमों का अनपेक्षित शिकार नहीं बनना चाहिए। आशंका है कि कार्रवाई के भय से पेट्रोल पंप संचालक वैध उपभोक्ताओं को भी डीजल देने से हिचक सकते हैं, जिससे आवश्यक सेवाओं, व्यापारिक गतिविधियों एवं आम नागरिकों के समक्ष अव्यवस्थित स्थिति उत्पन्न हो सकती है।”

कैमिट ने इस विषय पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर उनके तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध किया है तथा वास्तविक उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा हेतु आवश्यक स्पष्टीकरण एवं सुरक्षा उपाय जारी करने की मांग की है। चेंबर ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि अवैध थोक खरीद एवं वास्तविक उपभोक्ताओं द्वारा जनरेटर, आपातकालीन बैकअप एवं नियमित संचालन हेतु की जाने वाली वैध डीजल खरीद के बीच स्पष्ट अंतर किया जाए। साथ ही कैमिट ने एक व्यावहारिक सत्यापन एवं स्व-घोषणा (सेल्फ डिक्लेरेशन) व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया है, जिससे वास्तविक उपभोक्ताओं को बिना किसी बाधा के डीजल उपलब्ध हो सके तथा दूसरी ओर जमाखोरी, कालाबाजारी एवं दुरुपयोग के विरुद्ध कठोर कार्रवाई जारी रहे।

डॉ. अग्रवाल ने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में राज्य सरकार शीघ्र ही इस विषय पर संतुलित एवं व्यावहारिक निर्णय लेगी, जिससे वास्तविक उपभोक्ताओं और आवश्यक सेवाओं को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। कैमिट ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि जमीनी स्तर पर भ्रम एवं अनिश्चितता को दूर करने तथा महाराष्ट्र भर में वास्तविक उपभोक्ताओं को डीजल की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु तत्काल आवश्यक स्पष्टीकरण जारी किए जाएं।









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