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एनवीसीसी की सभा में ईसीजीसी के ब्रांच मैनेजर संतोष बिश्नाई ने निर्यातकों का किया मार्गदर्शन
5 अप्रैल 2026 3.00 PM
नागपुर - वर्तमान में ईरान- इजराइल-अमेरिका में चल रहे युद्ध के कारण संपूर्ण भारत के साथ महाराष्ट्र में भी आयात -निर्यात प्रभावित हो रहा है जिसके कारण निर्यातकों को कई समस्याएं आ रही हैं। तद्हेतु नाग विदर्भ चेंबर द्वारा होटल द्वारकामाई में आयोजित कार्यकारिणी सभा में निर्यातकों का मार्गदर्शन करने हेतु ईसीजीसी लिमिटेड, नागपुर के साथ चर्चासत्र रखा गया। जिसमें संतोष बिश्नोई, ब्रांच मैनेजर, विदर्भ क्षेत्र, ईसीजीसी लि., नागपुर ने अपने सहयोगी अमृतकुमार शाह,मैनेजर ने निर्यातकों का मार्गदर्शन किया।चेंबर के अध्यक्ष फारूक अकबानी ने शाॅल, श्रीफल, पुष्पगुच्छ व दुपट्टे से संतोष बिश्नोई का स्वागत सत्कार किया। उनका परिचय सचिव सीए हेमंत सारडा ने दिया।
उपाध्यक्ष व कार्यक्रम संयोजक स्वप्निल अहिरकर ने कार्यक्रम की प्रस्तावना में कहा कि भारत सरकार एवं ईसीजीसी ने युद्ध की परिस्थिति में निर्यातकों हेतु कुछ निर्णय तुरंत लिए जो कि अच्छी बात है। इस युद्ध के कारण मिडिल-ईस्ट ही नहीं बल्कि ईस्ट अफ्रीका और संपूर्ण विश्व भी प्रभावित हो रहा है। युद्धजन्य परिस्थितियों में ईसीजीसी द्वारा निर्यातकों को प्रोत्साहित करने और उनका नुकसान कम करने के लिए कौन-कौन सी योजनाएं शुरू की गई हैं तथा इनका निर्यातक कैसे लाभ ले सकते हैं,इस हेतु यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है।
संतोष बिश्नोई ने चेंबर के पदाधिकारियों को उन्हें इस सभा में निर्यातकों का मार्गदर्शन करने के लिए आमंत्रित करने हेतु धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि गत 6-7 वर्षों से कोराना जैसी महामारी और अलग-अलग देशों में युद्ध के कारण भारत में आयात-निर्यात बहुत प्रभावित हुआ। इस बार लगातार युद्ध के कारण संपूर्ण भारत में 6-7 करोड डाॅलर का निर्यात प्रभावित हुआ है। जिससे निर्यातकों हेतु ईसीजीसी द्वारा कुछ योजनाएं लाई गई हैं। जैसे, जिन निर्यातकों का 14 फरवरी से 15 मार्च तक बीएल निकल चुका है, उन्हें 100% इंश्योरेंस मिलेगा, साथ ही इस समय सीमा को 15 जून तक आगे बढ़ाया गया है। ईसीजीसी द्वारा नाॅन-पाॅलिसी धारकों के निर्यात को भी 50% तक इंश्योरेंस कवर किया जाएगा, बशर्ते वह निर्यातक एमएसएमई में रजिस्टर्ड होना चाहिए और उसके निर्यात में कोई एनर्जी गुड्स नहीं होना चाहिए।
उन्होंने बताया कि युद्ध की परिस्थितियों कारण यदि सरचार्ज उदाहरण के तौर पर 1000 से 1500 डाॅलर हो जाता है तो बढ़े हुये सरचार्ज को इंश्योरेंस में कवर किया जाएगा। किसी कारण कंटेनर वापस आता है तो नाॅन-पाॅलिसी होल्डर ईसीजीसी से क्लेम नहीं कर पायेंगे। ट्रांस शिपमेंट अगर 10 युुद्ध प्रभावित देशों में से होता है तो इंश्योरेंस कवर होता है और निर्यातक 50 लाख तक का क्लेम कर सकते हैं। संतोष बिश्नोई ने सभा में उपस्थित सभी निर्यातकों के सभी सवालों का जवाब दिया।
इस सभा में प्रमुखता से चेंबर के अध्यक्ष फारूक अकबानी, पूर्व अध्यक्ष प्रफुल दोशी, जगदीश बंग, अश्विन प्रकाश मेहाड़िया (अग्रवाल), आईपीपी अर्जुनदास आहूजा, उपाध्यक्ष स्वप्निल अहिरकर, सीए अश्विनी अग्रवाल, उमेश पटेल, सचिव सीए हेमंत सारडा, कोषाध्यक्ष सचिन पुनियानी, सहसचिव दीपक अग्रवाल, मनीष जेजानी, श्रीराम फुड इंडस्ट्रीज, पगारिया एक्सपोर्ट प्रा.लि., जिम लेबोरेटरीज, माइक्रोमेस मिनरल एन्ड मेटल्स व अन्य निर्यातक कंपनी के प्रतिनिधि, कार्यकारिणी सदस्य, विशेष आमंत्रित सदस्य, व्यापार संगठन के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।


























































































